विषय एवं शैली की दृष्टि से निबंध के भेद लिखिए | विषय की दृष्टि से निबंध के भेद लिखिए

दोस्तों बहुत सारे ऐसे लोग होते हैं, जिनको लिखना बहुत अच्छा लगता है और उनका दिमाग इतना रचनात्मक होता है, कि वह किसी भी घटना पर एक बेहतरीन निबंध लिख सकते हैं और उनके द्वारा लिखे गए निबंध लोगों को पढ़ने में भी बहुत अधिक रोचक लगते हैं।

लेकिन किस प्रकार की घटना के लिए कौन से निबंध लिखने हैं, इसके बारे में लोगों को पता नहीं होता है, इसीलिए कई बार लोग अच्छी जानकारी होने के बावजूद एक बेहतरीन निबंध नहीं लिख पाते हैं! 

इसीलिए आज हम आपको विषय एवं शैली की दृष्टि से निबंध के भेद बताएंगे, कि आखिर निबंध को कितने तरीकों से लिखा जा सकता है और किन घटनाओं के लिए किस तरह के निबंध लिखना सही है।

तो आइए अब इस आर्टिकल की शुरुआत करते हैं और जानते हैं, कि विषय एवं शैली की दृष्टि से निबंध को कितने भागों में बांटा जा सकता है।

विषय और शैली की दृष्टि से निबंध के कितने भेद होते हैं?

विषय एवं शैली की दृष्टि से निबंध के भेद लिखिए | विषय की दृष्टि से निबंध के भेद लिखिए

विषय एवं शैली की दृष्टि से निबंध को चार भागों में बांटा गया है, जोकि आगे सूचीबद्ध किए गए हैं।

  • विचारात्मक निबंध
  • भावनात्मक निबंध
  • वर्णनात्मक निबंध
  • विवरणात्मक निबंध

विषय की दृष्टि से निबंध के भेद | विषय एवं शैली की दृष्टि से निबंध के भेद लिखिए 

चलिए अब हम आपको विषय एवं शैली की दृष्टि से निबंध के भेद पर विस्तार पूर्वक जानकारी देते हैं। 

जैसा कि हमने आपको ऊपर इस लेख में बताया कि विषय एवं शैली की दृष्टि से निबंध को चार भागों में विभाजित किया गया है या विषय एवं शैली की दृष्टि से निबंध के चार भेद होते हैं, जिनके बारे में अब हम विस्तार से चर्चा करने जा रहे हैं।

विचारात्मक निबंध:

विचारात्मक निबंध एक ऐसा लेख होता है, जिसमें लेखक किसी विषय के बारे में अपने विचारों का विश्लेषण करता है, इस तरह के निबंध में लेखक अपने विचारों को विस्तार से लोगों के सामने प्रस्तुत करता है।

विचारात्मक निबंध में लेखक किसी विषय के बारे में उसके पृष्ठभूमि, संदर्भ और परिणामों के बारे में विस्तार से विचार करता है। विचारात्मक निबंध अलग-अलग विषयों पर लिखे जा सकते हैं, उदाहरण के लिए राजनीतिक, सामाजिक मुद्दे, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, संस्कृति आदि विषयो के बारे में लेखक अपने अनुभवो और विश्लेषण की सहायता से अपनी राय को पाठकों के सामने रख सकता है।

विचारात्मक निबंध को लिखने के लिए लेखक को उस विषय के बारे में गहन अध्ययन करने की आवश्यकता होती है, जिसके बारे में वह निबंध लिख रहा होता है, विचारात्मक निबंध वास्तविकता पर आधारित होता है, इसमें लेखक अपने दृष्टिकोण से उस विषय की व्याख्या करता है। 

भावनात्मक निबंध

भावनात्मक निबंध उस निबंध को कहते हैं, जिसमें लेखक अपने व्यक्तिगत अनुभवों, भावनाओं, और विचारों को व्यक्त करता हैं। इस तरह के निबंधों में लेखक अपनी अनुभूतियों और विचारों को अपने शब्दों में व्यक्त करता है और अपने लेखन से पाठकों के भावनाओं तक पहुंचने का प्रयत्न करता है। भावनात्मक निबंध का मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत विषयों को समझाना होता है तथा उसे पाठकों के साथ साझा करना होता है। इस तरह के निबंधों को सामान्य रूप से कविता और कहानियों के रूप में लिखा जाता है।

भावनात्मक निबंध में मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक दृष्टिकोण का अत्यधिक महत्व होता है, तथा इस तरह के निबंधों में भाव की प्रधानता होती है। इस प्रकार के निबंध व्यक्ति की संवेदनशीलता को प्रकट करते हैं। भावनात्मक निबंध में प्रेम, क्रोध, मित्रता जैसे भाव पर  निबंध लिखे जाते हैं। 

वर्णनात्मक निबंध

वर्णनात्मक निबंध में किसी विषय के बारे में विस्तार से वर्णन किया जाता है, इस तरह के निबंध में लेखक विषय के सभी विचारों और विवरणों का उल्लेख करता है। वर्णनात्मक निबंध में किसी व्यक्ति या वस्तु के बारे में विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया जाता है, जिससे पाठक को उस विषय के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो सके।

वर्णनात्मक निबंध में लेखक अपने अनुभव को व्यक्त नहीं करता है, बल्कि उस विषय का उल्लेख करते हुए उसे विस्तार से बताता हैं। वर्णनात्मक शैली में वस्तु तथा व्यक्ति की जानकारी के साथ साथ उनकी गुणवत्ता और अन्य विवरणों का भी वर्णन किया जाता है।

विवरणात्मक निबंध

विवरणात्मक निबंध उस निबंध को कहते हैं, जिसमें लेखक किसी विषय के बारे में गंभीर चिंतन मनन करके उस विषय के बारे में लिखता है, उसे विवरणात्मक निबंध कहते हैं।

इस तरह के निबंधों में विचारों की प्रधानता होती है और बुद्धि की प्रमुखता होती है, उदाहरण के लिए दहेज एक अभिशाप है, विवरणात्मक निबंध का उदाहरण है, विवरणात्मक निबंध में जिस विषय के बारे में निबंध लिखा जाता है, उसके लाभ, हानि विशेषताओं के बारे में बताया जाता है।

इन निबंधों में लेखक अपने ज्ञान के माध्यम से लोगों को प्रकाशित करने की कोशिश करता है, तथा उन्हें उस विषय के बारे में अत्यधिक जानकारी देने की तथा तथ्यों के बारे में बताने का प्रयत्न करता है।

निबंध की कितनी शैलियां होती है?

निबंध लेखन में मुख्य तौर पर 5 शैलियां होती हैं, जोकि निम्नलिखित हैं।

  1. समास शैली
  2. व्यास शैली
  3. प्रसाद शैली
  4. विपक्ष शैली
  5. प्रलाप शैली

आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि निबंध लेखन में मुख्य रूप से प्रायः शुरू की तीन शैलियों का उपयोग अधिक किया जाता है, इसलिए ज्यादातर इन्हीं तीन शैलियों के बारे में चर्चा की जाती है।

भावनात्मक निबंध लिखने का तरीका क्या है?

सच्ची मित्रता:

सच्चा मित्र उस मित्र को कहते हैं, जो हर मुश्किल समय में हमारा साथ दें और हमारे सुख दुख को अपना सुख दुख समझे, जो व्यक्ति हर परिस्थिति में हमारे साथ खड़ा रहता है, उसे ही सच्चा मित्र कहते हैं।

फिर चाहे कितना भी संकट क्यों ना हो, सच्चा मित्र सदैव साथ रहता है। सच्चा मित्र हमेशा अपने मित्र के बारे में अच्छा सोचता है, हमेशा उसको अपने जीवन में सफल होने के लिए प्रेरित करता है।

इसीलिए वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है, जिसको सच्चा मित्र मिलता है, क्योंकि जीवन में बहुत सारे लोग मित्र बन जाते हैं, लेकिन सच्चा मित्र बहुत कम ही लोग बन पाते हैं।

इसलिए हम सभी लोगों को अपने जीवन में बुलंदियों पर पहुंचने के लिए एक सच्चे मित्र की आवश्यकता होती है, जो हमें गलत मार्ग पर जाने से रोके और हमारा मार्गदर्शन कर सकें।

क्योंकि मित्र ही एक ऐसा व्यक्ति होता है, जिसके साथ हम सभी तरह के सुख दर्द को बांट सकते हैं और उससे अपनी परेशानियों को साझा कर सकते हैं, इसीलिए यदि एक अच्छा मित्र मिल जाए, तो व्यक्ति का जीवन सफल हो जाता है, लेकिन यदि कोई खराब मित्र मिल जाता है, तो वह अपने जीवन में गलत मार्ग पर चला जाता है और वह अपने लक्ष्य से भटक जाता है, इसलिए अपने जीवन में मित्र बनाते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

एक सच्चा मित्र हमेशा हमें हर मुसीबत में एक अच्छा मार्ग दिखाने में मदद करता है, सच्चा मित्र अपने फायदे और नुकसान के बारे में नहीं सोचता है, वह केवल अपने मित्र के फायदे और नुकसान के बारे में सोचता है तथा उसकी खुशी के लिए अपने सुख-दुख को भी भूल जाता है।

इसीलिए एक सच्चे मित्र के अंदर कभी भी स्वार्थ की भावना नहीं होती है, बल्कि उसके अंदर ईमानदारी और भावना के गुण होते हैं, जिससे वह लोगों के मनों को जीत लेता है, जिसके कारण उस व्यक्ति को भी अच्छे लोग मिलते हैं और वह भी अपने जीवन में सफलता की ओर आगे बढ़ता है।

हमारे शिक्षक भी हमें यही सिखाते हैं, कि अपने जीवन में हमें 2 से 4 दोस्त ऐसे बनाने चाहिए, जो जिंदगी भर हमारा साथ दें और हमें सही गलत की पहचान कराएं, जिससे हम अपने जीवन में गलत कार्यों की ओर अग्रसर ना हो और अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकें।

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निष्कर्ष – विषय एवं शैली की दृष्टि से निबंध के भेद लिखिए।

दोस्तों इस आर्टिकल के माध्यम से हमने आपको बताया, कि विषय एवं शैली की दृष्टि से निबंध के भेद कितने होते है और उसको कितने भागों में बांटा गया है।

इसके अलावा हमने इस आर्टिकल में निबंध के चारों भागों को विस्तार से बताया है, तथा उनमें किस तरह के निबंध लिखे जा सकते हैं, इसके बारे में भी जानकारी दी हैं। 

उम्मीद करते हैं, आपको यह आर्टिकल पढ़कर विषय एवं शैली की दृष्टि से निबंध के भेद कितने होते हैं, इसके बारे में पूरी जानकारी मिली होगी।

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